रुड़की (आयुष गुप्ता)
मंगलौर स्थित रामलीला भवन में प्रस्तावित निर्माण कार्य को लेकर स्थानीय स्तर पर गंभीर चिंताएं सामने आ रही हैं। प्रस्ताव के अनुसार, भवन के प्रथम तल पर एक बड़ा हाल तथा उसके ऊपर एक अतिरिक्त मंजिल का निर्माण किया जाना है। हालांकि, यदि समय रहते भवन निर्माण नियंत्रण एजेंसी, एचआरडीए, इस प्रस्तावित निर्माण का संज्ञान लेकर आवश्यक जांच और अनुमति प्रक्रिया सुनिश्चित नहीं करती है, तो भविष्य में भारी जानमाल के नुकसान की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
सूत्रों के मुताबिक, इसी माह मंगलौर रामलीला कमेटी ने रामलीला ग्राउंड में हाल और उसके ऊपर कुछ कमरों के निर्माण का प्रस्ताव पारित किया है। लेकिन कमेटी के भीतर ही इस निर्णय को लेकर मतभेद उभर कर सामने आए हैं। कुछ सदस्यों ने स्पष्ट रूप से इस निर्माण का विरोध किया है। उनका कहना है कि जिन पिलर्स पर यह पूरा ढांचा खड़ा किया जाना प्रस्तावित है, वे लगभग 15 वर्ष पुराने हैं। इन पिलर्स की संख्या 12 से 14 के बीच बताई जा रही है, जबकि प्रस्तावित निर्माण 4 हजार वर्ग फीट से अधिक क्षेत्रफल में फैलेगा।
सूत्र यह भी बताते हैं कि इस निर्माण कार्य के लिए एचआरडीए से आवश्यक स्वीकृति अभी तक प्राप्त नहीं की गई है, जो कि नियमों का उल्लंघन है। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी नए निर्माण से पहले मौजूदा पिलर्स की मजबूती और उनकी भार वहन क्षमता की तकनीकी जांच अत्यंत आवश्यक है। आशंका जताई जा रही है कि वर्तमान पिलर्स प्रस्तावित अतिरिक्त भार को सहन करने में सक्षम नहीं हैं, जिससे भविष्य में संरचना के कमजोर पड़ने या गिरने का खतरा बना रह सकता है। एक स्थानीय नागरिक ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा, यदि कल को इन पिलर्स पर बना भवन किसी दुर्घटना का कारण बनता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? हम जनहित में एचआरडीए से मांग करते हैं कि वह तत्काल पिलर्स की मजबूती की जांच कराए और निर्माणकर्ताओं को विधिवत अनुमति लेने के लिए बाध्य करें।

