रुड़की (आयुष गुप्ता)
मीडिया द्वारा प्रमुखता से खबर प्रसारित किए जाने के बाद नगर निगम द्वारा शहर में यूनिपोल और उन पर लगे विज्ञापनों को हटाने की कार्रवाई शुरू तो की गई, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। यह अभियान अब सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया है, जिससे निगम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
नगर निगम की टीम ने कुछ चुनिंदा स्थानों से पोस्टर और होर्डिंग हटाए जरूर हैं, लेकिन शहर के सबसे व्यस्त इलाकों बीएसएम तिराहा, आजाद नगर चैक, वैशाली मंडप, रामनगर चैक, मंडी क्षेत्र और ईदगाह चैक में अब भी बड़े पैमाने पर यूनिपोल और विज्ञापन जस के तस लगे हुए हैं। इन स्थानों पर दिनभर भारी भीड़ और आवाजाही रहती है, इसके बावजूद यहां कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही।
चर्चाएं है कि निगम सिर्फ दिखावे के लिए अभियान चला रहा है। जहां कोई दबाव या प्रभाव नहीं होता, वहां कार्रवाई कर दी जाती है, लेकिन शहर के प्रमुख और संवेदनशील स्थानों पर लगे यूनिपोल को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है। शहर में यह चर्चा भी जोरों पर है कि इन यूनिपोल के पीछे किसी प्रकार का दबाव काम कर रहा है या फिर नगर निगम और विज्ञापन कंपनियों के बीच आर्थिक लाभ का कोई संबंध हो सकता है। उल्लेखनीय है कि जिन कंपनियों को पहले टेंडर दिया गया था, उनका कार्यकाल बीती 31 मार्च को समाप्त हो चुका है और वर्तमान में कोई कंपनी निगम के द्वारा यूनीपोल विज्ञापन के लिए अधिकृत नहीं हैं, इसके बावजूद इन यूनीपोल पर विज्ञापन लगातार प्रदर्शित हो रहे हैं। वहीं, एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि जो विज्ञापन हटाए गए हैं, उस कार्रवाई का खर्च किसके जिम्मंे डाला गया है। क्या नगर निगम स्वयं यह खर्च वहन कर रहा है या संबंधित एजेंसियों से वसूली की जा रही है, इस पर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस पूरे मामले में जब रुड़की नगर निगम के टैक्स आॅफिसर एसपी गुप्ता से बातचीत की गई, तो उन्होंने बताया कि वे फिलहाल जनगणना कार्य में व्यस्त हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शहर में होर्डिंग हटाने का अभियान लगातार जारी है और आगे भी चलता रहेगा। फिलहाल, शहर के बीचों-बीच खड़े ये यूनिपोल नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान बने हुए हैं और आम जनता जवाब का इंतजार कर रही है।

