रुड़की (आयुष गुप्ता)
तहसील/ब्लाॅक रुड़की में जन्म प्रमाण पत्र न बनने के चलते बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती जा रही है। इसे हठधर्मिता कहें या फिर सरकारी ताकत का दुरूपयोग। इससे पर्दा उठाने का प्रयास किया जायेगा। जन्म प्रमाण पत्र बनवाना इतना कठिन हो गया है कि पहले तो तहसील में आॅर्डर कराने के नाम पर शोषण, उसके बाद फिर जांच रिपोर्ट लगवाने में मशक्कत। आम आदमी के बस से बाहर हो चला है।
गौरतलब है कि नोनिहालों की शिक्षा को जान-बूझकर बाधित किया जा रहा है या फिर दास्तावेजों के अभाव में उनका भविष्य गर्त में उतारा जा रहा है। सरकारी नियमानुसार प्राथमिक शिक्षा के लिए सरकार द्वारा 6 वर्ष की उम्र निर्धारित की गयी है। 6 साल उम्र होने के बाद ही नोनिहालों को स्कूल में प्रवेश दिया जा सकता है। स्कूल में प्रवेश के लिए नोनिहाल का आधार कार्ड प्राथमिक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। जिसको बनवाने के लिए जन्म प्रमाण पत्र मुख्य दस्तावेज है। सरकारी नियमावली के अनुसार बिना जन्म प्रमाण पत्र के आधार कार्ड नहीं बन सकता। लेकिन इस जन्म प्रमाण पत्र को जीरो से लेकर चार साल की उम्र तक तो आसानी से बनावाया जा सकता है, परंतु चार साल पूरे होने के बाद जन्म प्रमाण पत्र बनवाना आसान नहीं है। क्योंकि सरकारी अफसरों की मानमानी के चलते चार साल के बाद के जन्म प्रमाण पत्र, प्रार्थना पत्र पर अपनी आख्या लगाने से पहले स्कूल का दस्तावेज मांगा जा रहा है, जो अभिभावकों के पास नहीं है। इस स्थिति में नोनिहालों के जन्म प्रमाण पत्र नहीं बना पा रहे हैं। जबकि प्राथमिक दस्तावेज के रुप में एएनएम द्वारा बनाये गये पंजीकरण कार्ड होते हैं, जिनको ग्राम पंचायत विकास अधिकारी अधिकतर को अभिभावकों को यह कहते हुए नकार रहे हैं कि इनको तो फर्जी रुप से कहीं पर भी बनवाया जा सकता है। यहां गौर करने वाला पहलू है कि क्या ग्राम पंचायत विकास अधिकारी को यह जानकारी है कि यह फर्जी पंजीकरण कार्ड कहां बन रहे हैं? इन पर अंकुश लगाने के लिए ग्राम पंचायत विकास अधिकारी के स्तर कितने ऐसे लोगों पर कार्यवाही की गयी है, जिनके द्वारा फर्जी पंजीकरण कार्ड बनाये जा रहे हैं या फिर ग्राम पंचायत विकास अधिकारी खुद से ही चिकित्सा विभाग पर आरोप लगा रहे हैं? यह जांच का विषय है। इस पर आला अफसरों को ध्यान देने की आवश्यकता है। क्या वास्तव में फर्जी पंजीकरण कार्ड बनाये जा रहे हैं? अगर ग्राम पंचायत विकास अधिकारी के तर्क में सत्यता है, तो यह बहुत बड़ा अपराध पर से पर्दा उठाया जा सकता है। अगर यह सत्यता नहीं है, तो ऐसे ग्राम पंचायत विकास अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्यवाही भी की जानी चाहिए, जो सरकारी दस्तावेजों को फर्जी करार देकर अपनी आख्या लगाने में लापरवाही कर रहे हैं? सरकारी नियमों को ताक पर रखकर आवेदको को परेशान किया जा रहा है। आला अफसरों को ऐसे ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों को कड़ा संदेश देकर सरकारी दस्तावेजों का सम्मान व आम नागरिकों को परेशान न करने की हिदायते तत्काल देनी चाहिए जिससे नोनिहालों की शिक्षा बाधित न हो सके। मिर्जापुर मुस्तफाबाद निवासी एक महिला ने आलाधिकारियों से शिकायत की है कि उसके द्वारा अपने बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र के लिए तीन माह पूर्व आवेदन किया गया था। जिसमें समस्त दस्तावेज व पंजीकरण कार्ड की प्रति संलग्न कर ग्राम पंचायत विकास अधिकारी को दी गयी थी। जिनके द्वारा उक्त पंजीकरण कार्ड को फर्जी बताया गया तथा स्कूल से मान्य दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा गया, जबकि उसके जन्म प्रमाण पत्र न होने के चलते उसके बच्चों के पंजीकरण स्कूल में नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने कई बार ब्लाक से संबंधित कर्मचारियों से प्रमाण पत्र प्रार्थना पत्र पर आख्या का अनुरोध किया, परंतु उनकी सुनवाई नहीं की गयी। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत विकास अधिकारी की हठधर्मिता के चलते ही आलाधिकारियों से शिकायत की गयी है। यह मामला कोई एक ग्राम पंचायत का नहीं, यही स्थिति पूरे ब्लाॅक की है। अगर यह प्रकरण वास्तविक है, तो ग्राम पंचायत विकास अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही किया जाना न्यायोचित है। जन्म प्रमाण पत्र प्रक्रिया जटिलता के चलते नोनिहालों के भविष्य पर ग्रहण लग रहा है। इसके सम्बन्ध में जानकारी देते हुए ज्वाइंट मजिस्ट्रेट दीपक रामचंद्र शेट ने कहा कि यदि ऐसा हो रहा है, तो मामले को संज्ञान में लेकर जल्द व्यवस्था में सुधार कराया जायेगा और जल्द ही बीडीओ को निर्देशित किया जायेगा।

