रुड़की (आयुष गुप्ता)
आम के फलदार पेड़ों के अवैध कटान को लेकर उद्यान विभाग की लापरवाही लगातार चर्चाओं में रहती है, लेकिन इस बार विभाग की कार्यशैली पर उठे सवालों से लोगों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। हाल ही में सप्ताह भर पहले मंगलौर के अब्दुल कलाम चैक के आधा दर्जन के करीब आम के हरे पेड़ों को काटकर उन्हें वहीं छोड़ दिया गया था, जब इस मामले की खबर सामने आई, तो उद्यान विभाग ओर वन विभाग की कार्यशैली को लेकर लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं सामने आई। लोगों का कहना है कि जब खुलेआम हरे फलदार पेड़ों को माफिया किस्म के लोग अवैध रुप से काट रहे हैं, तो विभाग के अधिकारी और कर्मचारी क्या कर रहे है। चर्चा यह भी रही कि क्या विभाग ऐसे लोगों पर कार्रवाई करने में कतराता है। इन पेड़ों के अवैध कटान को लेकर दोनों विभाग के अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई तो नहीं की गई, लेकिन दिलचस्प बात यह रही कि सप्ताह भर बीत जाने के बाद भी यह आम के कटे हुये पेड़ ज्यों की त्यों स्थिति में खेत ही पड़े हुये है। जिसके बाद इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि वन और उद्यान विभाग के अधिकारी इन अवैध पेड़ों के कटान के मामले में कार्रवाई को लेकर कतई गंभीर नहीं है। यदि गंभीरता दिखाई गई होती, तो अब तक उक्त पेड़ों को जब्त कर लिया होता। लेकिन यहां ऐसा बिल्कुल देखने को नहीं मिला। उधर उद्यान विभाग मंगलौर के क्षेत्रीय अधिकारी प्रताप सिंह की बड़ी लापरवाही भी देखने को मिली है। जब भी अवैध पातन को लेकर उनसे वार्ता करने का प्रयास किया जाता है, तो वह फोन ही नहीं उठाते, ऐसे गैर जिम्मेदार अधिकारी को तैनात करना विभाग की भी लापरवाही दर्शाता है। वहीं वन विभाग के अधिकारी इसे उद्यान विभाग के पाले में डालकर अपनी जिम्मेदारियों से बच रहे है। अब देखना यह होगा कि आखिर कब तक इन पेड़ों को जब्त किया जायेगा और लकड़ी तस्करों के खिलाफ ठोस कार्रवाई अमल में लाई जायेगी।

