रुड़की (आयुष गुप्ता)
इकबालपुर शुगर मिल के सितारे गर्दिश में चल रहे है। हाल ही में कुछ लेन्डर्स द्वारा मिल के ऊपर अपनी धनराशि बताते हुए एक सार्वजनिक होर्डिंग फैक्ट्री में मैन गेट के सामने लगाया गया है। जिस पर लिखा गया कि सम्भवतः निवेशक, वित्तीय सहयोगकर्ता, प्रबन्धन, प्रतिनिधियों तथा सभी सम्बंधित पक्षों को बताया गया कि चीनी मिल पर प्रमोद चैधरी रुडकी, प्रहलाद चैधरी झबरेड़ा, शेर सिंह चैधरी लक्सर, नरेश त्यागी एवं अनन्त त्यागी रुडकी, प्रमोद त्यागी देवबंद, विरेश प्रताप सिंह चेयरमैन, हरविंद्र सिंह प्रधान गुनारसा, किशनलाल पुरी सहारनपुर, सागर सिंह, पूर्व एमडी अरूण कुमार भाटी, संजीव कुमार, आजाद सिंह, कर्मवीर सिंह अमरपुर तथा सम्राट शर्मा भगवानपुर की मिल पर वैध धनराशि बकाया है, जिसकी अदायेगी लंबित है। उक्त राशि 148 करोड़ रुपए बतायी गई है। इसके साथ ही बोर्ड पर यह भी लिखा गया कि कोई भी व्यक्ति, संस्था, पक्ष उक्त मिल को संचालित करने, प्रबंधन संभालने, निवेश करने अथवा किसी भी उत्तरादायी पद पर कार्यवाद लेता है, तो वह संबंधित बकाया की अदायेगी करने के बाद ही वित्तीय, प्रशासनिक या प्रबंधक गतिविधि शुरू करेगा। सभी लैन्डर्स ने कहा कि यह जानकारी विधिक साक्ष्य के रुप में मान्य होगी। साथ ही यह भी लिखा कि इसके अलावा मिल में कार्य करने वाले ठेकेदार, सप्लायर एवं श्रमिकों का वेतन भी बकाया चल रहा है। वहीं इसके साथ ही इकबालपुर शुगर मिल पर किसानों का भारी भरकम वर्ष 2018-19 व पिछले सत्र का गन्ना भुगतान बकाया चल रहा है। सोचनीय प्रश्न यह है कि इकबालपुर मिल के आसपास बड़ी संख्या में कोल्हू लगे हुए हैं। वह काफी फायदे में चल रहे हैं, जबकि शुगर मिल पर लगातार कर्ज बढ़ रहा है। इसके क्या कारण हैं। मिल न चलने से कर्मचारी अपने वेतन को लेकर अभी तक धरना दे रहे हैं तथा क्षेत्र का किसान भी काफी प्रभावित हुआ है। मिल मालिक को मिल की दयनीय दशा को लेकर चिंतन करते हुए मिल की कमान सही हाथों में देनी चाहिए, ताकि मिल को फिर से पटरी पर लाया जा सके। मिल में होर्डिंग लगने से क्षेत्र के लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। बहरहाल कुछ भी हो, लैन्डर्स द्वारा जो रकम बतायी गई, वह सही है या गलत? यह तो मिल मालिक ही बता सकती है।

