कलियर (आयुष गुप्ता)
हरिओम सरस्वती पीजी काॅलेज धनौरी में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में जिलाधिकारी मयूर दीक्षित छात्रों के बीच एक शिक्षक की भूमिका में नजर आए। कार्यक्रम में पहुंचने पर प्रबंध समिति की ओर से डाॅ. आदित्य सैनी, प्राचार्य डाॅ. मुनेंद्र सिंह समेत शिक्षकों और कर्मचारियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। कार्यशाला की अध्यक्षता डाॅ. हर्ष सैनी व संचालन डाॅ. योगेश कुमार ने किया। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने संस्थापक स्वर्गीय डाॅ. तेजवीर सिंह सैनी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
मंगलवार को धनौरी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी मंच से उतरकर सीधे छात्रों के बीच पहुंचे और उनसे संवाद किया। उन्होंने एक शिक्षक की तरह सवाल पूछे, छात्रों की जिज्ञासाएं सुनीं और सरल व प्रेरणादायक अंदाज में उनका समाधान कर उनका उत्साहवर्द्धन किया। उन्होंने आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ, राजनीति विज्ञान विभाग और सांस्कृतिक समिति के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित इस कार्यक्रम में युवाओं को सफलता का मूल मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए और उसे पाने के लिए ईमानदारी के साथ निरंतर प्रयास जरूरी है। सफलता पढ़ाई की मात्रा से नहीं, बल्कि गुणवत्ता और एकाग्रता से तय होती है। युवाओं को सचेत करते हुए उन्होंने मोबाइल के अत्यधिक उपयोग को समय और ऊर्जा की बर्बादी बताया। साथ ही डिजिटल अनुशासन अपनाने, समय का सदुपयोग करने और नशे व गलत संगति से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सही दिशा का चयन ही जीवन की सबसे बड़ी समझदारी है। संवाद सत्र में छात्रों ने भी खुलकर सवाल पूछे। एक छात्रा के कमजोर दृष्टि से जुड़ी चिंता पर जिलाधिकारी ने कहा कि कोई भी शारीरिक कमी सफलता में बाधा नहीं बन सकती। वहीं एमबीए के बाद सिविल सेवा में जाने को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि सही रणनीति और मेहनत से किसी भी पृष्ठभूमि का छात्र सफलता हासिल कर सकता है।

