रुड़की (आयुष गुप्ता)
इंजीनियरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल अब और तेज होती जा रही है। हड़ताल के दसवें दिन आंदोलन ने और जोर पकड़ लिया, जब पेयजल निगम और जल संस्थान के अभियंता भी इसमें शामिल हो गए। बढ़ते दबाव के बीच कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा आंदोलन स्थल पर पहुंचे और समाधान का आश्वासन दिया, लेकिन अभियंताओं ने साफ कर दिया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे पीछे नहीं हटेंगे। बुधवार को रुड़की समेत प्रदेशभर में उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ की हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। रुड़की सिंचाई विभाग परिसर में बड़ी संख्या में अभियंताओं ने एकत्र होकर शासन की नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। पेयजल निगम और जल संस्थान के अभियंताओं के शामिल होने से आंदोलन को नई धार मिली है, जिससे अब इसका असर आम जनजीवन पर भी दिखने लगा है। आंदोलन स्थल पर पहुंचे कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा ने महासंघ के प्रतिनिधियों से वार्ता की और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। उन्होंने आश्वस्त किया कि लंबित मांगों पर शासन स्तर पर जल्द कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान अभियंताओं ने उन्हें ज्ञापन सौंपते हुए वेतन विसंगतियों, ग्रेड पे, पदोन्नति और पुरानी पेंशन बहाली जैसी मांगों को प्रमुखता से उठाया। हड़ताल के चलते प्रदेश में ग्रामीण निर्माण, शहरी विकास, सिंचाई और राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के करीब 350 करोड़ रुपये के कार्य प्रभावित हो गए हैं। कई विभागीय बैठकों को भी स्थगित करना पड़ा है, जिससे प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है। महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस और लिखित निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता शौएब ने की, जबकि संचालन केरेश अली ने किया। इस दौरान शिव कुमार,लोकेश कुमार,गौरव त्यागी, अमर सिंह, गोपाल सिंह चौहान,विपिन सैनी, अनुज सैनी, नीटू, अनिल सैनी, स्वाति गुप्ता, सोनिया धीमान, रिया सैनी सहित कई अभियंताओं ने आंदोलन को तेज करने का आह्वान किया।

