रुड़की (आयुष गुप्ता)
दरगाह हजरत हाफिज मोहम्मद इस्हाक रह0 अलैहि0 के 76वें सालाना उर्स/मेला कुल शरीफ की रस्म के साथ संपन्न हो गया। दरगाह में कुल की रस्म पर अकीदतमंदों ने केवड़े और गुलाब जल से दरगाह की दीवारों को धोया। जिससे दरगाह परिसर केवड़े और गुलाब जल की खुशबू से महक उठी। तो वहीं अकीदतमंदों ने दरगाह में हाजिरी लगाकर अपने और अपने परिवार की सलामती और देश की खुशहाली की दुआ मांगी। इस दौरान दरगाह में मुल्क में अमन-चैन, भाईचारे और मोहब्बत के लिए भी दुआएं मांगी गई।
बढ़ेडी राजपूतान में हजरत हाफिज मोहम्मद इस्हाक रह. अलैहि. का तीन दिवसीय सालाना उर्स का कुल शरीफ की रस्म के साथ सकुशल समापन हो गया। इस दौरान कुल शरीफ की रस्म में दरगाह शरीफ को केवड़ा और गुलाब जल की खुशबू से महकाया गया। सैयद वासिफ हुसैन साबरी ने बताया कि सालाना उर्स में परंपरागत रस्मे निभाई जाती है। देर रात उर्स में बड़ी रोशनी के मौके पर कव्वाली की महफिल का आयोजन हुआ। अकीदतमंदों ने अस्ताने पर हाजरी देकर कव्वाली का लुत्फ उठाया। देर रात तक अस्ताने पर जायरीनों की भीड़ रही। महफिल की शुरुआत कुरानख्वानी की तिलावत से की गई। जिसके बाद दरगाह पर कव्वाली की महफिल का आगाज हुआ। जहां पर कव्वालो ने सूफियाना कलाम पेश किए, इस दौरान दरगाह पर देर रात तक चहल पहल दिखाई दी। इन सब रसुमात में सबसे आखरी रस्म कुल शरीफ की रस्म होती है, उर्स में जुमेरात की सुबह स्थानीय अकीदतमंदो के साथ मिलकर दरगाह शरीफ को केवड़ा और गुलाब जल की खुशबू से महकाया गया। जिससे दरगाह परिसर केवड़े और गुलाब जल की खुशबू से महक उठी और अकीदत के फूल पेश किए। उसके बाद देश की तरक्की और खुशहाली की दुआएं मांगी गई। इस दौरान बड़ी संख्या में अकीदतमंद स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे।

