रुड़की (आयुष गुप्ता)
नेशनल इंस्टीट्यूट आॅफ हाइड्रोलाॅजी (एनआईएच), रुड़की के वैज्ञानिकों की एक टीम ने ग्राम पहांसू (जनपद सहारनपुर) में ‘शौचालय उपयोग का भूजल एवं सतही जल पर प्रभाव’ विषय पर एक अध्ययन के अंतर्गत जल गुणवत्ता परीक्षण हेतु विशेष सर्वेक्षण अभियान चलाया, जिसमें विभिन्न स्थानों से जल नमूने एकत्र किए गए। इस अभियान के अंतर्गत ग्राम के 12 अलग-अलग स्थानों से जल के नमूने एकत्रित किए गए। इसमें गाँव के तालाब के भी सैंपल लिए गए। इन नमूनों को एनआईएच की प्रयोगशाला में वैज्ञानिक पद्धति से जाँचा जाएगा, जिससे यह पता लगाया जा सकेगा कि पेयजल एवं अन्य जलस्रोतों में कौन-कौन सी समस्याएँ या प्रदूषक तत्व विद्यमान हैं। इन नमूनों का परीक्षण कर यह परिवर्तन का मूल्यांकन किया जाएगा कि शौचालय के बढ़ते उपयोग का जल की गुणवत्ता पर क्या प्रभाव पड़ रहा है। गाँव में यह अभियान ग्रामीणों की दीर्घकालिक माँग पर प्रारम्भ किया गया, क्योंकि पिछले कुछ समय से जल गुणवत्ता को लेकर लोगों में चिंता बनी हुई थी। वैज्ञानिकों ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि जाँच रिपोर्ट आने के बाद जल की गुणवत्ता सुधारने के लिए आवश्यक सुझाव एवं तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। इस अवसर पर एनआईएच रुड़की से डाॅ. राजेश सिंह, डाॅ. विनय त्यागी, डाॅ. कालजांग छोडेन एवं डाॅ. शक्ति सूर्यावनाशी मौजूद रहे। ग्राम पहांसू की ओर से विपिन पंवार, अरुण पंवार सिंह, प्रवीन कुमार एवं प्रमोद कुमार ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया। इसके अतिरिक्त सभी ग्रामवासियों ने भी इस अभियान में बढ़-चढ़कर सहभागिता निभाई। ग्रामवासियों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि जल गुणवत्ता परीक्षण की यह वैज्ञानिक कार्यवाही भविष्य में स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी और ग्रामीणों को जलजनित रोगों से बचाने में सहायक बनेगी।

